Good Marks Vs Strong Minds

Good Marks Vs Strong Minds

हर माता-पिता अपने बच्चे के लिए एक बेहतर भविष्य का सपना देखते हैं। हम चाहते हैं कि हमारा बच्चा पढ़ाई में अच्छा करे, समाज में नाम कमाए और एक सुरक्षित जीवन जिए। इसी चाहत में हम अक्सर एक ही चीज़ को सफलता का पैमाना बना लेते हैं – अच्छे नंबर। लेकिन आज एक बहुत बड़ा और ज़रूरी सवाल उठता है: क्या अच्छे नंबर सच में एक सफल और खुशहाल जीवन की गारंटी हैं?

आज के समय में बच्चे पहले से ज़्यादा नंबर ला रहे हैं, लेकिन साथ ही पहले से ज़्यादा तनाव, डर, आत्मविश्वास की कमी और मानसिक दबाव भी झेल रहे हैं। यह विरोधाभास हमें सोचने पर मजबूर करता है कि कहीं हम अपने बच्चों को गलत दिशा में तो नहीं ले जा रहे। नंबर बढ़ रहे हैं, लेकिन मन कमजोर क्यों हो रहा है?

आज के बच्चे छोटी-सी असफलता से घबरा जाते हैं। परीक्षा का नाम सुनते ही उनका आत्मविश्वास डगमगाने लगता है। वे लगातार दूसरों से अपनी तुलना करते हैं और खुद को कमतर समझने लगते हैं।

असल समस्या पढ़ाई नहीं है। समस्या है बच्चे के मन और दिमाग की तैयारी।

हम बच्चों को क्या सिखा रहे हैं? हम उन्हें सिखा रहे हैं क्या याद करना है, लेकिन यह नहीं सिखा रहे कि कैसे सोचना है। हम उन्हें यह सिखा रहे हैं कि सवाल का जवाब क्या है, लेकिन यह नहीं सिखा रहे कि सवाल पूछना क्यों ज़रूरी है।

Strong Mind क्या होता है? Strong Mind का मतलब टॉपर होना नहीं है। 

Strong Mind वाला बच्चा वह होता है जो:

  • दबाव में भी शांत रह सके,
  • गलती होने पर खुद को बेकार न समझे,
  • असफलता को सीखने का अवसर माने,
  • अपने मन की बात बिना डर के कह सके,
  • और अपनी तुलना केवल खुद से करे।

ऐसा बच्चा नंबरों के पीछे नहीं भागता, बल्कि सीखने की प्रक्रिया पर ध्यान देता है। और जब प्रक्रिया सही होती है, तो परिणाम अपने आप बेहतर आने लगते हैं।

अब सवाल उठता है कि बच्चों का मन कमजोर क्यों हो रहा है? इसका जवाब हमारी रोज़मर्रा की Parenting में छुपा है।

Parenting की पहली बड़ी गलती – तुलना जब हम कहते हैं: “उसके कितने नंबर आए?” “वह तुमसे बेहतर है।” तो हम अनजाने में बच्चे के मन में यह विश्वास बैठा देते हैं कि वह पर्याप्त नहीं है।

दूसरी गलती – रिज़ल्ट पर प्यार जब बच्चे को अच्छे नंबर लाने पर ही तारीफ मिलती है, तो वह यह मान लेता है कि उसका मूल्य केवल प्रदर्शन से है।

तीसरी गलती – भावनाओं को दबाना “रोना मत।” “इतनी छोटी बात पर परेशान क्यों होता है?” इससे बच्चा भावनाओं को समझना नहीं, उन्हें छुपाना सीख जाता है।

चौथी गलती – Busy Parenting हम बच्चों के लिए सब कुछ करते हैं, लेकिन बच्चों के साथ समय नहीं बिताते। बच्चे को सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है आपकी मौजूदगी की, न कि आपकी सुविधाओं की।

पांचवीं गलती – नंबर ही भविष्य हैं असल ज़िंदगी में सफलता का आधार होता है: आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता, भावनात्मक संतुलन, और खुद पर विश्वास।

यही कारण है कि पहले Strong Mind बनाना ज़रूरी है, फिर Marks अपने आप बेहतर होंगे।

Samarth Mashtiska का Parenting दृष्टिकोण हम मानते हैं कि Parenting का मतलब बच्चों को कंट्रोल करना नहीं, बल्कि उन्हें समझना और सक्षम बनाना है।

हमारे Parenting Program में फोकस किया जाता है: बच्चे के मस्तिष्क विकास पर, भावनात्मक मजबूती पर, व्यवहार को समझने पर, और Practical Parenting Tools पर।

जब बच्चा अंदर से मजबूत होता है, तो वह पढ़ाई, रिश्तों और जीवन की चुनौतियों को बेहतर तरीके से संभाल पाता है।

अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा: डर के बिना पढ़े, असफलता से टूटे नहीं, खुद पर भरोसा करे, और ज़िंदगी के लिए तैयार हो, तो आज ही Samarth Mashtiska Parenting Program से जुड़िए। क्योंकि नंबर बदले जा सकते हैं, लेकिन बचपन में बना आत्मविश्वास पूरी ज़िंदगी साथ रहता है।

मजबूत मन = मजबूत भविष्य

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